सुनील शेट्टी ने कभी भी सफलता को सिर्फ बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से नहीं आंका। पीपिंग मून को दिए एक इंटरव्यू में अभिनेता ने अपने करियर, निजी संघर्षों, अनुशासन, फिटनेस और उन मूल्यों पर खुलकर बात की, जिन्होंने दशकों तक उन्हें इंडस्ट्री में प्रासंगिक बनाए रखा। सुनील का मानना है कि सच्ची प्रासंगिकता नंबरों से नहीं, बल्कि पीढ़ियों से दर्शकों के साथ बने रिश्ते से आती है।
इंटरव्यू में सुनील शेट्टी ने बताया कि साल 2017 उनके जीवन का सबसे मुश्किल दौर रहा। उनके पिता वीरप्पा शेट्टी का उसी साल निधन हो गया, जबकि वे 2014 से बीमार थे। सुनील ने कहा कि वह लंबे समय तक अपने पिता की देखभाल में लगे रहे और इस कारण मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गए थे।
उन्होंने कहा, “मैं मानसिक रूप से ठीक नहीं था। मैंने पूरी तरह से काम छोड़ दिया था।”
उन्होंने यह भी साझा किया कि जिस सुबह उनके पिता का निधन हुआ, उसी सुबह उन्हें एक हेल्थ शो का ऑफर मिला। सुनील के मुताबिक, उस पल को उन्होंने एक संकेत की तरह लिया, जिसने भावनात्मक खालीपन के बावजूद उन्हें दोबारा काम की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया।
आत्मविश्वास के साथ वापसी
करीब छह से सात साल तक फिल्मों से दूर रहने के बाद वापसी आसान नहीं थी। सुनील ने स्वीकार किया कि इंडस्ट्री बदल चुकी थी और उनका आत्मविश्वास भी डगमगा गया था।
उन्होंने कहा, “जब आप इतना लंबा गैप लेते हैं, तो लगता है कि आपको अपना काम नहीं आता, लोग आपको भूल चुके हैं।”
हालांकि, महामारी के बाद उन्हें खुद पर काम करने का समय मिला। उन्होंने ट्रेनिंग, पढ़ाई और मानसिक मजबूती पर ध्यान दिया। सुनील के अनुसार, इस आत्ममंथन ने उन्हें यह एहसास कराया कि उन्हें किसी बाहरी वैलिडेशन की जरूरत नहीं है। यही सोच उनके भीतर नए आत्मविश्वास का कारण बनी।
फिटनेस बनी सबसे बड़ी ताकत
सुनील शेट्टी मानते हैं कि फिटनेस के प्रति उनका आजीवन समर्पण ही वह वजह है, जिसने उन्हें लंबे समय तक फिल्मों से दूर रहने के बावजूद दर्शकों से जोड़े रखा।
उन्होंने कहा कि भले ही वह लाइमलाइट में न रहे हों, लेकिन मीडिया और दर्शकों के प्यार ने उन्हें हमेशा जीवित रखा। उनके अनुसार, आज का दर्शक उन लोगों से ज्यादा जुड़ता है जो ऑर्गेनिक और रियल लगते हैं।
40 करोड़ का तंबाकू विज्ञापन ठुकराया
इंटरव्यू का सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब सुनील शेट्टी ने बताया कि उन्होंने 40 करोड़ रुपये का तंबाकू एंडोर्समेंट ऑफर ठुकरा दिया।
उन्होंने कहा, “मुझे तंबाकू विज्ञापन के लिए 40 करोड़ रुपये ऑफर किए गए थे। मैंने साफ कहा कि क्या तुम्हें लगता है मैं पैसे के लिए ऐसा करूंगा?”
सुनील ने बताया कि यह फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत था। वह ऐसा कोई काम नहीं करना चाहते थे, जिससे उनके बच्चों अहान और अथिया की छवि पर कोई दाग लगे। उनके अनुसार, यही वजह है कि अब कोई ऐसी पेशकश लेकर उनके पास आने की हिम्मत भी नहीं करता।
प्रासंगिकता का नया अर्थ
बातचीत के अंत में सुनील शेट्टी ने आज के दौर में प्रासंगिकता को लेकर अपनी सोच रखी। उन्होंने कहा कि भले ही वह बॉक्स ऑफिस की दौड़ में सबसे आगे न हों, लेकिन आज भी 17–18 साल के युवा उन्हें अपना आइडल मानते हैं।
उनके शब्दों में, “इतना प्यार और इज्जत मिलना किसी भी कमाई से बड़ा है। कुछ करोड़ रुपयों के लिए मैं इससे समझौता नहीं करूंगा।”
सुनील शेट्टी के लिए अब प्रासंगिकता ट्रेंड्स, हेडलाइंस या ओपनिंग नंबर्स से नहीं, बल्कि निरंतरता, चरित्र और उस विरासत से जुड़ी है जो समय से आगे निकल जाती है।








